_ "Kridha"

Others


4.7  

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अनोखी मुलाक़ात

अनोखी मुलाक़ात

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"हा ठीक हूं, मैं ट्रेन में बैठ चुकी हूं , ट्रेन शुरू होने में अभी वक्त है वैसे भी ये रोज - रोज का है ट्रेन कहाँ समय पर चलती है , जब ट्रेन शुरू होगी तब मैं दुबारा कॉल करूंगी " ये कहकर सीमा ने फोन रख दिया । सीमा अपनी मां से बात कर रही थी ।सीमा का ये रोज - रोज का काम था । एक शहर से दूसरे शहर में आना - जाना , वो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही थी , उसने ग्रेजुएशन पूरा कर लिया था और पिछले चार सालों से वो सरकारी नौकरी की कोशिश कर रही थी । उसका एक ही सपना था । सरकारी नौकरी करने का , वो पूरी कोशिश कर रही थी लेकिन फिर भी वो कुछ नंबर से हमेशा चूक जाती थी

सीमा एक मध्यम परिवार की लड़की थी । उसके अलावा उसके चार भाई बहन और थे जो सब उससे छोटे थे वो ही सबसे बड़ी थी । उसके माता - पिता चाहते थे कि वो पढ़ लिख कर किसी तरह अपना कैरियर बना ले । उसकी भी यही सोच थी इसलिए उसने तय किया था कि शादी होने से पहले वो किसी सरकारी नौकरी करेगी ताकि बाद में कोई परेशानी ना हो ।वो अपने ख़यालो में खोई हुई थी तभी

"यात्रीगण कृपया ध्यान दे अजमेर से जयपुर जाने वाली रेलगाड़ी 10 बजकर 10 मिनट पर रवाना होने वाली है" ये सुन कर उसका ध्यान टूटा उसने देखा इस अनाउसमेंट के बाद सभी यात्री अपनी - अपनी सीट पर आकर बैठ गए थे । वो अपनी सीट पर ही बैठी थी ।

5 मिनट बाद ट्रेन चल पड़ी उसने फोन उठाया और अपनी मां को कॉल किया "हां माँ ट्रेन शुरू हो चुकी है , मैं शाम तक जयपुर आ जाऊंगी स्टेशन से बाहर आकर कॉल करूंगी .... आप पापा को कहिएगा की मुझे लेने आ जाए "

"ठीक है " माँ ने कहा , उसने फोन रख दिया , अब वो अपने आस - पास देख रही थी ।

ट्रेन में सबसे मजेदार यही होता है लोगो को देखना , अलग - अलग लोग , अलग - अलग भाषा , अलग - अलग कपड़े सब अपनी दुनिया में होते है । कोई किसी से मिलने जा रहा था तो कोई किसी से मिल के आ रहा था । कोई खुुश नजर आ रहा था तो किसी को किसी बात का गम था ।

सीमा अब अपनी बोगी में देख रही थी , उसकी नजर सामने बैठे उस लड़के पे गई वो लड़का हाथो में फोन लिए कानों में हेड फोन लगाके बैठा था , शायद वो कुछ देख रहा था , सीमा की नजर उसके फोन पे गई ।

इसके पास तो स्मार्ट फोन है दिखने में एकदम नया और लेटेस्ट लग रहा था , वो अब अपने फोन की तरफ देखने लगी जो एक कीपैड फोन था ,

" काश मेरे पास भी उसकी तरह एक स्मार्ट फोन होता तो ये 4-5 घंटे जल्दी से निकल जाते " वो सोच रही थी ।

वो अब उस सामने बैठे लड़के के फोन में देखने की कोशिश कर रही थी , ये जानते हुए कि किसी के फोन में इस तरह से ताक - झाक करना ग़लत बात है । 

उसने देखा वो लड़का कोई फिल्म देख रहा था , चुकी उस लड़के ने अपने कानों में हेडफोन लगा रखा था इसलिए बाहर कोई आवाज नहीं आ रही थी ।

सुनाई तो उसे कुछ दे नहीं रहा था पर वो फिल्म देख सकती थी .... इसलिए उसने सोचा की टाइम पास करने के लिए म्यूट फिल्मी ही देख लूं । वह उस म्यूट फिल्म को देख रही थी ।

शायद फिल्म अभी शुरू ही हुई है वो देख रही थी क्यूंकि फिल्म में नाम आ रहे थे अब वो चुपचाप उस लड़के के फोन में चल रही फिल्म देख रही थी , देखते - देखते उसे पता ही नहीं चला कि 3 घंटे कब के निकल चुके है ।

 पर अभी भी 2 घंटे बचे हुए थे ....

उस लड़के ने फिल्म देखने के बाद अपना फोन रख दिया है , और आराम करने लगा ।


अभी भी दो घंटा बचा है अब मैं क्या करूं , ऐसे ही कुछ सोचते सोचते उसकी आंख लग गई , और उसे पता ही नहीं चला की उसका स्टेशन आ चुका हैं।

" सुनिए ! उठ जाइये स्टेशन आ चुका है , ये उसी लड़के की आवाज थी " जिस लड़के का फ़ोन सीमा चुपके से देख रही थी ।

सीमा जल्दी से उठ गई और उस लड़के को घूरने लगी ..... उसने उस लड़के से पूछा "आपको कैसे पता की मेरा स्टेशन आ चुका है । "

" क्यूकि ये लास्ट स्टॉप है , इसके आगे ट्रेन शायद नहीं जाए " इतना कहकर वो मुस्करा दिया ।

 

"अरे हाँ ! मैं तो भूल गई " उसने मन में सोचा और ट्रेन से उतरने लगी ।

" तो फिल्म कैसी लगी" पीछे से किसी ने कहा उसने पीछे मुड़ कर देखा ये वहीं लड़का था ,

"इसे कैसे पता चला इसका सारा ध्यान तो फिल्म में था " सीमा ने सोचा ।

वो कुछ बोलती उससे पहले उसने बोलना शुरू किया " आप जब मेरे फोन में देख रही थी , तभी मैं समझ गया था कि आप फिल्म देखना चाहती है इसलिए मैने फोन थोड़ा सा आपकी साइड कर दिया पर बिना आवाज की फिल्म कैसे समझ आती है , ये पूछना था " और वो लड़का हॅसने लगा ।

"मैं बोर हो रही थी इसलिए " सीमा ने कहा । 

" तो आप मुझे कह देती मैं हेडफोन हटा देता " उस लड़के ने कहा ।

"आप भी तो पूछ सकते थे " ये कहकर सीमा भी हंस पड़ी । 

"हाँ शायद अगली बार याद रखूंगा " ये कहकर वो निकल पड़ा ।वो लड़का अपने रास्ते और सीमा अपने रास्ते !

........

निकल पड़े वो दोनों अपने - अपने रास्ते ,

मंज़िल पाने की दोनों में जो ललक थीं ,

अनोखी मुलाक़ात में दोनों अजनबी से,

हल्की सी मुस्कान उनके साथ थीं!


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