Dr Jogender Singh(jogi)

Others


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आटा मैगी

आटा मैगी

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“ मुझे बिल्कुल अच्छी नहीं लगती आटा मैगी। क्यों बनाती हो ? मुझे नहीं खानी।” मुझे ब्रेड दे दो सेंक कर। अभिनय तुनक कर बोला।

“तुम्हीं तो कहते हो मैगी बना लो ” अब नाटक कर रहे हो। मृदुला ने अभिनय को डाँटा।

” ग़लत बात मत करो मम्मी ” मैंने आटा मैगी के लिए नहीं बोला था। अपने हिसाब से बात पलट रही हो। मैं नहीं खाऊँगा मतलब नहीं खाऊँगा। 

“ क्या हुआ ? मनीष ने बेडरूम से आवाज़ लगाई। “ क्यों लड़ रहे हो सुबह / सुबह ” नाश्ता मिलेगा या नहीं ?

“कुछ नहीं पापा ” अभिनय ने जवाब दिया।

“ पापा ने सुन लिया, पड़ गया चैन ? अभिनय मृदुला के पास आकर धीरे से बोला। इसीलिए ज़ोर /ज़ोर से चिल्ला रहीं थी।

“ आज खा ले राजा बेटा, आगे से मैदा मैगी ही बनाऊँगी, पक्का।” मृदुला ने चिरौरी की।

लाओ ! अभिनय तुनक कर बोला। “ सॉस तो दे दो ” और चाय गर्म कर दो। 

“क्यों बनाती हो आटा मैगी ? जब उसको पसंद नहीं। मैदा मैगी बना दिया करो, कितने दिन साथ रहेगा। थोड़े दिन बाद चला जायेगा फिर याद करोगी। मनीष ने धीरे से मृदुला को समझाने की कोशिश की।

”तुम तो हो ही धृतराष्ट्र, पुत्र प्रेम में अन्धे। सारी बुराई मुझ में ही नज़र आती है ” मृदुला ग़ुस्से से बोली।

” ठीक है, जो करना है करो। मनीष चुपचाप नाश्ता करने लगा।

अभिनय ने जैसे तैसे मैगी ख़त्म की। “ एक तो इसमें पड़े गाजर / मटर इतने ख़राब लगते हैं, जैसे बासी हों, दूसरा मैगी का स्वाद भी अजीब लगता है। 

“ तुम्हें फ़ायदे वाली कोई भी चीज अच्छी कहाँ लगती है, खूब खाओ मैदा फिर दिन भर डकार मारते रहो।” मृदुला ने धीमी आवाज़ में ग़ुस्से से बोला। कोई प्राणायाम तुम्हें करना नहीं, खेलने से कोई मतलब नहीं। दिन भर मोबाइल और लैपटॉप में आँखें फोड़ो और बाज़ार की गन्दे तेल में बनी चीज़ें खाओ। 

कितनी तो पढ़ाई करनी है, भाषण मत दो मम्मी। अभिनय पैर पटकता हुआ अपने कमरे में चला गया। 

क्या सोच रही हो ? मनीष ने हलके से मृदुला का हाथ छुआ। मैगी ठण्डी हो जायेगी, वैसे भी तुम्हारी मनपसंद आटा मैगी है। 

“ अभिनय की याद आ गई। मृदुला ने नम आँखों से मनीष की तरफ़ देखा। कितना लड़ते थे हम दोनों इसी मैगी को ले कर।

अब उतनी स्वाद नहीं लगती, सारा स्वाद अभिनय के साथ चला गया। पता नहीं परदेश में क्या खाता होगा ? कितना पसंद था उसको गर्मा गर्म रोटी खाना, अब पता नहीं। मृदुला की आँखों से आँसू बहने लगे। मैं कब उसको समय दे पाई, रात का खाना अक्सर ख़ुद ले कर खा लेता था। 

ठीक है, अबकी बार जब छुट्टी आयेगा तब उसको जी भर के दुलारना, उसकी मनपसंद का खाना बनाना। और आटा मैगी का तो नाम भी न लेना। मनीष ने मृदुला के हाथ पर धीरे से थपकी देते हुए कहा।

दोनों आँखों में नमी लिए मुस्कुरा दिए।



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