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mohammed urooj khan khan

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mohammed urooj khan khan

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आलौकिक दुनिया(ग्रे रंगco.6)

आलौकिक दुनिया(ग्रे रंगco.6)

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कमरे में एक अजीब तरह की तकलीफ से गुजर रही लड़की को पास खडे डॉक्टर द्वारा बेहोशी का इंजेक्शन लगा कर शांत करने की कोशिश की जाती है, ये कोई आज पहली बार का नही था, ये तो महीनों से होता आ रहा था,,, अब तो डॉक्टर भी जवाब दे चुके थे,,, क्यूंकि किसी भी मरीज का इलाज तब ही सम्भव है ज़ब उसके मर्ज का पता चल पाए, लेकिन उस लड़की के केस में मर्ज क्या है, ये बता पाना अब डॉक्टर्स के बस की बात नही थी, क्यूंकि उन्होंने हर सम्भव कोशिश करके देख ली थी, जिससे की वो लड़की ठीक हो पाती, सी टी स्कैन से लेकर MRI और इलेक्ट्रिक शॉक भी किया गया लेकिन उसके हालात में कोई सुधार नही आया, अब बस उसे शांत करने का एक ही उपाय था और वो था उसे बेहोश रखना,, क्यूंकि ज़ब वो होश में आती है, तब अजीब तरह की आवाज़े और दर्द भरी कररहाटे निकालती है, जिसे सुन अच्छे अच्छे की सास थम जाए।


डॉक्टर अपना काम करके वहां से झूठा आश्वासन उस लड़की के पति और उसकी सास को देकर चले गए थे, वो एक नामी ग्रामी खानदान की बहु थी, अब तो मीडिया में भी चर्चा होने लगी थी कि आखिर भारद्वाज परिवार की को क्या हुआ? क्यूँ हर रोज़ एक डॉक्टर् उनके घर आता है? क्यूँ वो अब लाइम लाइट से दूर रहते है, और भी अन्य तरह के सवाल उठने लगे थे।


अनिल भारद्वाज जो कि उस लड़की सुधा भारद्वाज का पति है, अपनी पत्नि कि ऐसी हालत देख उदास हुआ बाहर बरामदे में बैठा था, और उन दिनों को याद कर रहा था ज़ब सुधा और उसकी शादी हुई थी सब कितना अच्छा था वो दोनों अपनी अपनी जिंदगी में बेहद खुश थे और फिर नही पता किसकी नजर लग गयी कि अचानक सुधा बीमार रहने लगी,,, धीरे धीरे उसे दौरे पड़ने लगे,,, फिर दर्द से चीखने चिल्लाने लगी, पहले तो थोड़ा बहुत बात चीत कर लिया करती थी लेकिन अब तो बिलकुल जिन्दा लाश बन कर रह गयी है, भले ही उन दोनों कि अरेंज मैरिज थी लेकिन फिर भी दोनों में बहुत जल्दी अंडरस्टैंडिंग हो गयी थी, जिस वजह से अनिल को सुधा से बेइंतेहा मोहब्बत हो गयी थी,, उससे उसकी ये हालत देखी नही जा रही थी, उसे डर लग रहा था कि कही सुधा उसे छोड़ कर चली न जाए इसलिए उसने उसके इलाज में कोई भी कमी नही छोड़ी, भगवान कि दया से उनके पास पैसे कि कोई कमी नही है, उसके इलाज में वो पैसा पानी की तरह बहा रहा था इस उम्मीद के साथ कि एक दिन उसकी सुधा ठीक हो जाएगी,,, लेकिन अब लग रहा था कि वो शायद अब कभी बिस्तर से नही उठ पायेगी,,, इन्ही सब विचारों को अपने मन में लिए अनिल बाहर बरामदे में उदास बैठा था, कि अचानक उसे अपने कांधे पर किसी का स्पर्श महसूस होता है


वो गर्दन घुमा कर देखता है, तो पीछे उसकी माँ ख़डी थी


"अरे माँ तुम,, तुम कब आयी " अनिल ने कहा अपनी उदासी भरी आवाज़ में


उसकी वो आवाज़ सुन उसकी माँ जान गयी थी कि अनिल उदास है,,, भले ही वो किसी को नही बट रहा है, लेकिन वो अंदर से टूट रहा है,, सुधा कि इस लाइलाज बीमारी की वजह से


उसकी माँ, उसके पास बैठते हुए कहती है " बेटा! मुझसे क्या छिपाना,,, तुम चाहो तो अपना दर्द मुझसे बाट सकते हो,,, मुझे भी सुधा की चिंता,,, भगवान जाने किसकी नजर लग गयी मेरी बहु को,,, मेरे हस्ते खेलते घर को। "


अपनी माँ के मूंह से इतना सुनना था कि अनिल उनके कांधे पर सर रख कर रोने लगता है, मानो उसे ऐसे ही किसी कांधे की जरूरत थी और माँ से अच्छा कांधा किसका हो सकता है।


वो सुधा को खोने से डरता है,,, क्यूंकि वो उसे बहुत प्यार करता है, वो ये सब अपनी माँ को बताता है, उसकी माँ जो बहुत प्यार से उसकी बातों को सुन और समझ रही थी।


ज़ब वो अपनी बात मुकम्मल कर लेता है, तब उसकी माँ उसके गालों पर स्नेह भरा हाथ फेरते हुए उसके आंसुओ को अपने आँचल से पोछते हुए कहती है " बेटा! तेरी हालत को मैं बहुत अच्छे से समझ सकती हूँ,,,हम जिससे प्यार करते है उसे तकलीफ में कैसे देख सकते है,,, बेटा तूने बहु को इस दर्द और तकलीफ से निजात दिलाने के लिए हर सम्भव कोशिश करके देख ली लेकिन उसकी हालत में कोई बदलाव नही आया बल्कि वो तो पहले से और बदतर हो गयी है, अब तो डॉक्टर ने भी हाथ खडे कर दिए है, क्यूंकि उन्हें भी अब कुछ समझ नही आ रहा है कि आखिर उसे बीमारी क्या है, इसलिए वो बस उसे बेहोश करके चले जा रहे है,, ताकि उनके प्रोफेशन पर कोई ऊँगली न उठे,, लेकिन बेटा मुझे लगता है,,, कि बहु का इलाज किसी डॉक्टर् या हकीम के पास नही है।"


"तो फिर किसके पास है माँ,,, मैं वहां चला जाऊंगा,,, सुधा को बचाने के खातिर अगर मुझे सात समंदर पार से भी किसी को बुलाना पड़े तो मैं पीछे नही हटूँगा,,, मैं उसे तकलीफ में नही देख सकता, मैंने आज से पहले कभी भी खुद को इतना निराश नही देखा जितना कि अब इन बीते दिनों और महीनों में खुद को पाया है,,, अब तो पैसा भी बेकार लगने लगा है,, ज़ब अपनी पत्नि को ही नही बचा पा रहा हूँ पैसा होने के बावज़ूद तो क्या फायदा पैसे पास होने का " अनिल ने कहा रोते हुए।


"बेटा इस तरह नही रोते, भगवान पर भरोसा रखो सब ठीक हो जाएगा, बेटा जो बात मैं तुमसे कहने जा रही हूँ, शायद तुम्हे सुन थोड़ा अजीब लगे और शायद तुम मुझ पर गुस्सा भी करो, लेकिन बेटा अब मैं खुद को रोक नही सकती तुम्हे ये बात बताने से, फिर तुम चाहे इन बातों पर यकीन करो या न करो।


बेटा तुम भी मानते हो, और देख भी रहे हो कि डॉक्टर्स ने अपने हाथ खडे कर दिए है, उनके पास भी सिवाय इंजेक्शन के और कुछ नही बचा सुधा को देने के लिए,,, क्यूंकि न तो दवाई ही काम कर पा रही है और न ही कोई ट्रीटमेंट इसलिए बेटा एक बार मेरी बात मान कर सुधा को किसी तांत्रिक को दिखा दो, भले ही तुम्हे अजीब लगेगा लेकिन बेटा अब बस यही एक रास्ता बचा है,, वरना तो तुमने सब कुछ अजमा कर देख लिया है " अनिल की माँ संध्या जी ने कहा


अनिल को अपनी माँ की बात सुन थोड़ा अजीब लगा, क्यूंकि उनके कहने का मतलब था कि सुधा पर किसी भूत प्रेत का साया है, जिसे उतारने के लिए किसी तांत्रिक को बुलाना पड़ेगा,, लेकिन उसकी नजर में ये सब एक अंधविश्वास है, उसने अपनी माँ के साथ काफ़ी बहस भी कि लेकिन आखिर कार उसने सुधा के खातिर इस रास्ते पर भी चलना सही समझा मरता क्या न करता, उसे तो बस अपनी सुधा वापस चाहिए थी, इसलिए वो न चाहते हुए भी अपनी माँ की बात मान लेता है, और एक तांत्रिक बाबा को अपने घर ले आता है, जिसके बारे में उसकी माँ ने उसे बताया था


तांत्रिक बाबा ने पहले तो उसके पूरे घर का मुयायना किया उसके बाद बिस्तर पर बेहोश पड़ी सुधा की और देखा, और कहा " ये कब से इस तरह की हालत में है "


"लगभग तीन महीने से " अनिल ने कहा


"ठीक है,,, मुझे थोड़ा गंगा जल लाकर दो " बाबा ने कहा


अनिल ने घर के नौकर से मंदिर में रखा गंगा जल लाने को कहा,


थोड़ी देर बाद, बाबा ने ज़ब सुधा के हाथ और माथे पर गंगा जल रगड़ा तब ही बेहोश पड़ी, सुधा ने अपनी आँखे खोल कर एक विचित्र मुस्कान से बाबा की तरफ देखा, मानो वो बाबा को चिड़ा रही हो,,, और फिर उसने आँखे बंद कर ली


"क्या हुआ बाबा,,,? ये क्या किया आपने,,, सुधा ने इस तरह आँखे क्यूँ खोली,,, सब ठीक तो है " अनिल की माँ ने कहा घबराते हुए


"कुछ ठीक नही है,,, बिलकुल भी ठीक नही है,,,, तेरे सामने जो बिस्तर पर लेटी है,,, ये तो एक जिन्दा लाश है,,,, इस शरीर की आत्मा तो कही और है,,, इसकी आत्मा इस दुनिया में नही बल्कि किसी दूसरी दुनिया में है,,, जिसे आलौकिक दुनिया कहते है " बाबा ने कहा


"ये क्या बकवास है,,, माँ मैंने आपसे मना किया था,,, कि इस तरह इन तांत्रिको को मत बुलाइये,,, देखा किस तरह कि बाते कर रहा है ये,,, इससे कहे चला जाए यहाँ से " अनिल ने कहा गुस्से से


"मेरे जाने से अगर तेरी पत्नि के शरीर की आत्मा वापस आ जाए तो मैं ख़ुशी ख़ुशी चला जाऊ,,, लेकिन ऐसा मुमकिन नही,,, तू चाहे कितने ही डॉक्टर्स से इसका इलाज करा ले लेकिन इसका इलाज सम्भव नही,,, क्यूंकि इसकी आत्मा इसके शरीर में है ही नही इसकी आत्मा एक आलौकिक दुनिया में कैद है, और जो आत्मा इसके शरीर में है वो किसी और की है,, जो शायद इससे कोई बदला ले रही है,, और जो मुस्कान इसने मुझे अभी दिखाई थी उस का मतलब मुझे ललकारना था " बाबा ने कहा।


"मेरी बहु को कैसे बचाया जा सकता है, बाबा,,, भगवान के लिए कुछ कीजिए मेरी बहु को बचा लीजिये, मैं आपके आगे हाथ जोड़ती हूँ,,, मेरा बेटा भले ही विश्वास करे या न करे लेकिन मैं करती हूँ,,, मुझे तो पहले से ही शक था,, कि मेरी बहु पर किसी का साया है " अनिल की माँ ने कहा


अपनी माँ को इस तरह देख और बाबा को भी इस तरह से बताते देख अनिल को भी थोड़ा यकीन हुआ लेकिन पूरा नही, क्यूंकि उसके पास कोई और चारा भी तो नही था, इसलिए उसने बाबा से कहा " ठीक है,,, मैं आपकी बातों पर यकीन करता हूँ,,, लेकिन मेरी पत्नि को कैसे बचाएंगे आप, आपके पास क्या समाधान है। "


बचाने वाला तो सिर्फ ईश्वर है, हम तो बस कोशिश कर सकते है,,, तेरी पत्नि को बचाने के लिए पहले उसके बारे मैं जानना जरूरी है, कि आखिर कौन है जिसने तेरी पत्नि की आत्मा को आलौकिक दुनिया में कैद कर लिया है, या तो कोई इसका दुश्मन है या फिर कोई इसे अपने से दूर नही होने देना चाहता है


"मुझे कुछ ऐसा लाकर दो, जो ये बीमार होने से पहले सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया करती थी,, इसके हाथों में वो चीज ज्यादा समय बिताती थी, क्यूंकि इंसान जिस चीज को ज्यादातर इस्तेमाल करता है, उस चीज में उसकी ऊर्जा और शक्ति सबसे ज्यादा केंद्रित हो जाती है, उससे ही इसके भूतकाल का पता चल सकता है " बाबा ने कहा


ये सुन अनिल ने अपना दिमाग़ दोड़ाया,, उसकी सास ने भी दिमाग़ के घोड़े दोड़ाए, कि आखिर उसकी बहु सबसे ज्यादा किस चीज को इस्तेमाल करती थी तब ही अनिल की नजर आयने पर जाती है, और उसे वहाँ रखा कंघा दिखाई पड़ता है, सुधा को बाल संवारने का बहुत शोक था हर समय अपने घने बालों को संवारती रहती थी, ज़ब भी समय मिलता


अनिल ने वो कंघी लाकर, बाबा के हवाले कर दी, जिसके बाद बाबा ने कुछ मन्त्र का उच्चारण कर अपनी आँखे बंद की और कंघी पर स्पर्श करते हुए बोले " तेरी पत्नि के जीवन में तुझसे पहले भी किसी अन्य मर्द का साया था लेकिन वो न तो बाप था और न भाई, शायद कोई प्रेमी था "


"जी,,, जी,,, सुधा ने मुझे बताया था, कि शादी से पहले एक लड़का उससे प्यार करता था पहले तो वो उसे इग्नोर करती थी लेकिन बाद में वो भी उसकी और खिंचने लगी थी, सुधा अमीर घर की लड़की थी लेकिन वो लड़का गरीब था, लेकिन सुधा को इस बात से कोई फर्क नही पड़ता था, सुधा ने बताया था कि वो दोनों घंटो घंटो बाते किया करते थे, लड़का हमेशा उसे एक बहुत दूर ले जाने की बाते करता, क्यूंकि वो जानते थे कि उनके बीच जो अमीरी गरीबी की खायी है, उसके चलते उनका मिलन सम्भव नही है, वो उसे एक ऐसी दुनिया या जगह में ले जाने की बात करता था जो उन दोनों को अलग करने वालो से कही दूर थी , जहाँ वो दोनों आराम से रह सकेंगे, सुधा को उसकी बाते अच्छी लगती थी, शायद वो धरती पर ही कही बहुत दूर जाने की बात करता था 


फिर एक दिन उसके ताया ने उन दोनों को देख लिया था बात करते हुए, जिसके बाद से उनका प्रेम प्रसंग सबके सामने आ गया, सुधा ने ये सब मुझे उसके साथ सगाई वाले दिन बताया था उसने ये भी बताया था, कि उस दिन के बाद से वो उससे कभी नही मिली,, पापा और ताया ने मिलकर उसे खूब मारा था या फिर उसे जान से मार दिया कुछ नही कह सकते, वो मेरे साथ जिंदगी नए सिरे से शुरू करना चाहती थी इसलिए वो अपने अतीत को राज नही रखना चाहती थी, लेकिन उस लड़के का सुधा से अब क्या लेना देना क्या वो बदला लेने आया है "अनिल ने कहा


शायद,,, बदला भी हो सकता है,,, और शायद वो उसे अपने साथ भी ले जाने आया हो,,, जैसा की मुझे दिख रहा है, कि सुधा के घर वालो ने सुधा की शादी तुमसे जबरदस्ती की है, और उस लड़के को उन्होंने मार दिया था और नदी में फेंक दिया था, लेकिन उसकी किस्मत अच्छी थी वो नदी से जिन्दा बाहर निकाल लिया गया,,, और ज़ब तक ठीक होकर वो अपनी सुधा के पास पंहुचा तब तक वो तुम्हारे साथ विदा हो गयी थी।


सुधा भले ही उसे भूल गयी थी लेकिन वो नही भूला था, वो उसे अपने साथ ले जाना चाहता था, तुम्हारी पत्नि शादी के बाद भी उससे मिली थी, ज़ब वो उसे ले जाने आया लेकिन शायद अब बहुत देर हो चुकी थी इसलिए तुम्हारी पत्नि ने अपना पत्नि धर्म निभाना सही समझा और उसे चले जाने को कहा।


सुधा भले ही उसे भूल चुकी थी लेकिन वो नही भूला था, अब उसे लगने लगा था कि सुधा और उसका मिलन अब इस धरती पर सम्भव नही, इसलिए उसने काले जादू का सहारा लिया और अपनी जान एक शैतान के हवाले करदी ताकि वो उसकी मदद से सुधा को अपने साथ एक आलौकिक दुनिया में ले जा सके जहाँ वो तुम्हारी पत्नि नही बल्कि उसकी प्रेमिका बन कर रहेगी,,, और देखो वो कामयाब रहा तुम्हारी पत्नि की आत्मा तो शुरू दिन से ही उस आलौकिक दुनिया में कैद है जहाँ उसका प्रेमी उसे ले गया है,,, ये तो सिर्फ हाड़ मास का पुतला है, जिसमे आत्मा उस लडके की है जो सुधा के शरीर के जरये तुम्हे परेशान कर रहा है क्यूंकि तुमने ही उससे उसका प्यार छीना है,,, बाबा ने आँखे बंद किये किये ही बताया


ये सुन कर सबके होश उड़ गए, अनिल जान गया था कि तांत्रिक बाबा सही कह रहे है, क्यूंकि सुधा ने बताया था उस लड़के के बारे में कि वो दोबारा उससे मिलने आया था, अब बस अनिल को अपनी सुधा को बचाना था, जिसके लिए वो हाथ जोड़ कर तांत्रिक बाबा के सामने खड़ा कह रहा था " बाबा,,, कोई तरीका तो होगा मेरी सुधा को उस आलौकिक दुनिया से मुक्त कर यहाँ लाने का,,, मैं कुछ भी करने को तैयार हूँ। "


बाबा ने एक गहरी सास ली और बोले " उस दुनिया में जाने का बस एक ही तरीका है, कि तुम्हे अपनी पत्नि का हाथ थाम कर ध्यान मुद्रा में इस तरह बैठना होगा कि चाहे कुछ भी हो जाए तुम्हे उसका हाथ नही छोड़ना होगा,,, वो शैतान बन चुका इसका प्रेमी तुम्हे सुधा की आत्मा इतनी आसानी से मुक्त नही करने देगा,,, वो अपना हर सम्भव प्रयास करेगा कि सुधा को वही रोक ले और तुम्हे मार दे, एक बार अगर तुम्हे कुछ हो गया तो फिर सुधा भी हमेशा हमेशा के लिए वही कैद हो जाएगी,,, तुम्हारा उसके प्रति सच्चा और निस्वार्थ प्रेम ही तुम्हारा और उसका रक्षक बनेगा तुम्हारे हाथ पर मैं ये ग्रे रंग का कपड़ा बांध रहा हूँ कहते है इस रंग में बुराई का नाश करने की क्षमता है इस शैतानी आत्मा को अगर कोई रोक सकता है तो सिर्फ ये कपड़ा ही है जिसे मां कात्यानी की पूजा अर्चना कर मेने हासिल किया है,ये रंग माँ कात्यायनी का पसंदीदा रंग है जिसे नो दुर्गो के दौरान पहना जाता है और इसे पहन कर ही माँ की पूजा अर्चना की जाती है इस रंग में बुराईयों को नाश करने की क्षमता है। ज़ब तुम उस अलौकिक दुनिया में पहुंच जाओगे और वो शैतान तुम्हे हर पल रोकने की कोशिश करेगा तब ये कपड़ा ही तुम्हारी हिफाज़त करेगा उसी के साथ अगर तुम ये कपड़ा उस शैतानी आत्मा के हाथ में बाँधने में सक्षम हो गए तब वो आत्मा वही भस्म हो जाएगी बस यही एक उपाय है तुम्हारी पत्नि को बचाने का कहो तुम तैयार हो "


अनिल ने बिना एक भी बार सोचे हाँ कह दी, उसने माँ को गले लगाया, और फिर तांत्रिक के बनाये घेरे में बैठ कर बिस्तर पर लेटी सुधा का हाथ पकड़ लिया जिस पर बाबा ने कुछ मंत्र से जड़े धागे बांधे थे और वो ग्रे रंग का कपड़ा भी। 


और ध्यान मुद्रा में बैठ गया,,, थोड़ी ही देर में उसने खुद को एक अलग ही दुनिया में पाया जो इस दुनिया से कही ज्यादा अलग थी,, रंग बिरंगे झरने,,, रंग बिरंगी तितलियाँ,,, कोई भी वहाँ मन्त्र मुग़द हो जाए।


तब ही उसे सफ़ेद कपड़ो में झूले पर झूलती सुधा नजर आयी, जो कि पहल से और ज्यादा हसीन लग रही थी उसे इस तरह देख अनिल की ख़ुशी का ठिखाना नही था वो दौड़ता हुआ उसके पास पंहुचा वो उसे छूने ही वाला था की तेज प्रहार उसके हाथ पर हुआ उसकी चीख निकल गयी और हाथ से खून भी बहने लगा।


जो हाथ अनिल सुधा का पकड़े हुए था, उस हाथ से खून बहने लगा, जो की इस बात का प्रतीक था की अनिल उस अलौकिक दुनिया में पहुंच गया है और उसका सामना उस लड़के की आत्मा से भी हो गया है।


अनिल जो की सुधा को वहाँ से ले जाने आया था, अपनी जी जान लगा कर उस शैतान का सामना करता है, वो बुरी तरह जख़्मी हो गया था,,, सुधा की आत्मा उसे पहचान नही रही थी क्यूंकि उस शैतानी आत्मा ने उसे सब भुला दिया था,


लेकिन अनिल को अपने प्यार पर भरोसा था उसने अपनी जी जान लगा दी उस शैतान से सुधा को छुड़ाने की और फिर पूरी तरह घायल होने के बाद ज़ब उस शैतान को लगा की वो मर गया है और सुधा हमेशा के लिए उसकी हुई और वो उसे लेकर जाने लगा तब ही सुधा ने उसे मुड़ कर देखा मानो उसे प्यार का एहसास होने लगा था,,, उसके चेहरे पर उदासी थी जो बता रही थी की वो उससे दूर जाना नही चाहती उसके चेहरे की उदासी ने मानो अनिल को फिर से जिन्दा कर दिया और हवा की तरह उड़ कर जाकर उसने अपने हाथ में पड़ा वो कपड़ा उस शैतानी आत्मा के हाथ में बांध दिया ये सब इतनी जल्दी हुआ कि वो शैतानी आत्मा ज़ब तक कुछ कर पाती तब तक उसका आधा शरीर भस्म बन चुका था


सुधा जो की बिस्तर पर बेसुध पड़ी थी जोरदार चीख मार कर उठती है, और अनिल का नाम पुकारती है,,, अनिल जो की जख़्मी हालत में होते हुए भी उसके पास जा पंहुचा इतने दिनों बाद अपना नाम उसके मूंह से सुन अनिल की ख़ुशी का ठिखाना नही रहा था


. उसके प्यार की जीत हो गयी थी, उसने उसे गले से लगा लिया सुधा को मानो कुछ याद ही नही था, उसे तो ऐसा महसूस हो रहा था कि वो काफ़ी अरसे से बस सौ रही थी


समाप्त.....


कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है,,


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