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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Children Stories Inspirational

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Dr. Vijay Laxmi"अनाम अपराजिता "

Children Stories Inspirational

आखिर क्यों ?भाग 10

आखिर क्यों ?भाग 10

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शिंजो "मम्मी मम्मी जी एक बात और मेरे मन में है मुझे मेरी सहेलियों से पता लगा कि मेल को भी मेन्स्ट्रुएशन होता है ,इस बात में कितनी सच्चाई है


मधुरा "हां बेटा यह बात आज के आधुनिक वैज्ञानिकों ने शोधों से जाना कि मेन्स्ट्रुएशन महिलाओं की तरह पुरुषों को भी आते हैं । मैं तुम्हें एक उदाहरण रूप में बता रही हूं कि जैसे बचपन में स्तन नर और मादा दोनों बच्चों में होते हैं और पैदाइशी सफेद रंग का दूध जैसा स्राव भी निकलता है पर आगे चलकर ये महिलाओं के विकसित हो जाते हैं ।पुरुषों के नहीं विकसित होते हैं ।

इस लशीले पदार्थ को ग्रामीण महिलाएं दूध की संज्ञा देती है "। वैसे ही पुरुषों में मासिक धर्म अनुभवजन्य ही होते हैं, हां रक्तस्राव नहीं होता है ।


मेल मेन्स्ट्रुएशन को मेडिकल भाषा में "आईएमएस" कहते हैं । इस का मतलब है "इरिटेबल मेल सिंड्रोम" पुरुषों के शरीर में भी एक उम्र बाद परिवर्तन आने शुरू हो जाते हैं ।आवाज में भारीपन होना । रोम ग्रंथियों का सक्रिय होना,दाढ़ी-मूंछ आना ,स्वप्न दोष होना आदि लक्षण उनके शरीर में भी समय आने पर उभरते हैं । 


उचित व्यायाम , स्वस्थ्य आहार परामर्श से इस समस्या से आसानी से निपटा जा सकता है या कम किया जा सकता है ।


इस विकास की उम्र लगभग 13 से 18 के बीच होती है । महिलाओं के अंडाणु की तरह पुरुषों में टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन शुक्राणु का उत्पादन करते हैं ।


शरीर में समय-समय पर इस हार्मोन का स्तर कम या ज्यादा होता रहता है तभी डिप्रेशन ,थकान , पेट दर्द, अपच , भूख न लगना या सामान्य से अधिक लगना चिंता मूड का बदलना आदि लक्षण दिखाई पड़ते हैं । 


इसी से किशोरावस्था के बच्चों में प्राय स्वभाव व व्यवहार में एक विशेष बदलाव परिलक्षित होता है । यहां तक कि सीधे से सीधे बच्चे में भी मनोवैज्ञानिक परिवर्तन होने से क्रोध करना, विद्रोही प्रवृत्ति ,जिद्दी , स्वाभिमानी वृत्ति दिखाई पड़ती हैं । इसी को बुजुर्ग अपनी भाषा में कहते हैं , "जवानी चढ़ रही है कोई की सुनता ही नहीं " पर ये बदलाव की पूर्ण प्राकृतिक प्रक्रिया व अवस्था होती है ।


यह बदलाव हार्मोनल न्यूरो डेवलपमेंटल परिवर्तन के कारण देखने में आता है बच्चे भावुक , सामाजिक भी होने लगते हैं । सभी में अलग-अलग स्तर का बदलाव देखने में आता है । बौद्धिक क्षमता बढ़ी होने के कारण, वे तार्किक भी हो जाते हैं। घर में बच्चों को माता-पिता द्वारा उचित परामर्श मिलते रहने से समस्याओं का सही समाधान होता रहता है ।


शिंजो सिया*****

"तभी शिंजो और सिया दोनों नंद भाभी एक साथ बोल पड़ती है मम्मी जी मम्मी जी!! किसी भी महिला या लड़की को इस सब को फेस करने के लिए क्या जानकारी होनी चाहिए कि हमें यह दर्द भी न सहना पड़े "? 


मधुरा*****

"बेटा पीरियड के दौरान प्रोस्टाग्लैंड नामक हार्मोन पेट दर्द या खिंचाव का कारण होता है । हमें इन दिनों अपनी सफाई और स्वच्छता के बारे में सबसे अधिक सतर्क व जागरूक होना चाहिए। अभी तक भारत में स्वच्छता की ओर इतना ध्यान नहीं दिया जाता था । इसका मुख्य कारण गरीबी ,पैसे का अभाव आत्मनिर्भर ना होना हैं । 

दूसरा कारण पुरुषों का भली-भांति जानकारी के अभाव में महिलाओं के प्रति उपेक्षित व्यवहार करना भी रहा । 


अब हमें इस विषय में अधिक परेशान होने की जरूरत भी नहीं रह गई है ।आज बहुत से ऐसे सेनेटरी नैपकिन , कपड़े की पैड, मासिक धर्म का कप ,टेंपून आदि उपयोगी वस्तुएं आ गई हैं , जिससे हमें बाहर निकलने चलने-फिरने में कोई असुविधा नहीं होती है ,अच्छा महसूस करते हैं ।साबुन पानी की भी उपलब्धता आज गांव ,कस्बे व शहर सभी जगह है ।


आजकल जूट , केले के रेशे जलकुंभी रुई ,कपास से बने नैपकिन्स भी आ गए हैं पर इनसे भी त्वचा की एलर्जी का डर रहता है । सेनेटरी नैपकिन पर्यावरण के लिए भी सही नहीं है । 


यह गैर बायोडिग्रेडेबल टैम्पून एथलीट तैराकों व पश्चिमी देश में ही सर्वसुलभ हो पाते हैं । क्योंकि इतने महंगे पड़ते हैं कि हर एक इनका प्रयोग नहीं कर पाता है । यही समस्या मासिक धर्म कप के साथ भी है । कपड़े के या काॅटन के पैड ही अच्छे हैं । 


अंडर गारमेंट्स की सफाई के प्रति जागरूक होना चाहिए। इनको पर्याप्त धूप में सुखाना चाहिए। पीरियड पैंटी भी एक लोकप्रिय विकल्प का रूप ले रही है। 


आजकल तो वेल्में नाम का एक उपकरण भी आ गया है ।

यह वैज्ञानिक रूप से पुष्ट व सुरक्षित टेंस (tens) तकनीक पर आधार आईटी वेल्में पीरियड दर्द निवारक उपकरण हो रहा है बिना किसी दुष्प्रभाव के तंत्रिकाओं को उत्तेजित करके दर्द को रोकता है । यह एंडोर्फिन के स्राव में भी सहायक है ।


इसको प्राकृतिक दर्द निवारक हार्मोन कहना अधिक सटीक होगा यह तुरंत काम करना शुरू कर देता है इस्तेमाल में भी यह आसान है ।


बहुत सी लड़कियों को सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया की स्वच्छता की जानकारी और सटीक समझ नहीं होती ,इसी कारण स्वच्छता के अभाव में बहुतों को मूत्र पथ व प्रजनन संक्रमण हो जाने से भी दर्द व तकलीफ बढ़ जाती है । विकलांग विशेष जरूरत वाली लड़कियों को और भी चुनौती पूर्ण कष्टकारी होता

है ।


शेष पढ़े अगले भाग में तर्क-वितर्क के साथ ।



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