आ बैल मुझे मार
आ बैल मुझे मार
मोहित अपनी किराने की दुकान पर बैठा हुआ तभी मुकेशजी कुछ सामान लेने आए और उसे देखकर अचंभित होते हुए बोले "अरे बेटा तुम छुट्टी लेकर आये हो क्या? जो आज तुम यहाँ दिख रहे हो।"
मोहित बोला "हाँ काका परमानेंट छुट्टी लेकर आया हूँ।"
मुकेश जी बोले "परमानेंट छुट्टी इसका क्या मतलब है?"
मोहित हताश स्वर में बोला "क्या बताऊँ काका मैने खुद आ बैल मुझे मार वाली कहावत चरितार्थ की है पहले एक अच्छी कंपनी में मेरी जॉब लग गई पर वहाँ समय ज्यादा देना पड़ता था इसलिए मैंने वह जॉब छोड़ दी और सरकारी नौकरी के लिए प्रयास करने लगा, फिर एक बार मेरी डिग्री और किस्मत ने मेरा साथ दिया और मैं बैंक में पीओ की पोस्ट के लिए चयनित हो गया, पर इस काम हेतु भी समय अधिक देना होता था तो मैंने सोचा की जब समय अधिक ही देना है तो क्यो न प्राइवेट कंपनी में ही काम किया जाए। परन्तु इस बार मेरी किस्मत ने मेरा साथ नहीं दिया और हार कर मुझे इस पुश्तेनी दुकान पर बैठना पड़ा।"
