दृढ़निश्चय करके अनजान सफर की ओर कदम बढ़ा रही थी !
लेकिन उन्हीं यादों के साथ आने वाले कल को संवारना तो हमारे ही हाथ में है।
एक रुसी लोककथा का हिंदी अनुवाद......
ये देखते ही उसके भीतर गाती चिड़िया का मैंने बन्दूक से शिकार कर दिया और वो भी मर गयी, चलो अच्छा हुआ अब मुझे लोग पागल नहीं ...
अब जिंदा इंसान रीढ़ की हड्डी आते ही नए खिलौने की खोज में निकाल पड़ा। उसके हाथ खून से लाल
मेरे से ज़्यादा चिड़िया को उस पौधे पर विश्वास था