काम, क्रोध कभी शांत ना होते, उनमें ही रमता मैं जाऊँ काम, क्रोध कभी शांत ना होते, उनमें ही रमता मैं जाऊँ
काश, सतकर्म करके सतमार्ग में जाता, ये खुशी और गम की कशमकश में नहीं फँसता काश, सतकर्म करके सतमार्ग में जाता, ये खुशी और गम की कशमकश में नहीं फँसता