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हवाओं शक्ति बेचैनी द्रोह असंख्य परलोक न सुनें फरियाद व्यग्र हो चिल्लाते दर्दनाक जीवन भूख कोलाहल पनाह अधिकार मनुष्य तहस-नहस सताए कर्तव्यों को विस्मृत कर हिन्दीकविता hindikavita

Hindi चिल्लाते Poems