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पीड़ित परलोक व्यग्र हो चिल्लाते दोष अधिकार न सुनें फरियाद खरोंच अच्छी कविता बेचैनी जीवन सताए ज्ञान शक्ति कर्तव्यों को विस्मृत कर तहस-नहस भूख असंख्य दर्दनाक हिन्दीकविता मनुष्य

Hindi चिल्लाते Poems