STORYMIRROR

Amit Kumar

Others

3  

Amit Kumar

Others

यकीन

यकीन

1 min
252

किसकी बात का यकीं करें हम

सब बहुत ख़र्च करते हैं

दिमाग़ अपना और

तालों में बंद रखते है दिलों को।

अपने रोशन दिमाग़ में

इतना ज़ंग लगाकर वो,

बात करते है रौशन ख़्याल होने की।

भूल बैठे हैं वो अंधकार में ही

ज़्यादा होती है उम्मीद सुबह के होने की।

    


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन