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Luxmi Maurya

Others

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Luxmi Maurya

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ये अकेला मन

ये अकेला मन

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किसी की आँखों में सजा

कोई ख़्वाब कोई

अधूरी सी बात

किसी झरोखे के पीछे

छुप गए अगली सुबह के

इंतजार में सहमा सहमा सा

ये मन दिन ढलते ही

और सहमने लगता है


इसमें तो पहले ही

कितना अंधेरा था

यह तो पहले ही कितना

अकेला था

यह अकेला मन

कहां ढूँढता

अपना आशियाना।।


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