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Luxmi Maurya

Others

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Luxmi Maurya

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मन्नतों का इक दीया

मन्नतों का इक दीया

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बीत गया है बहुत कुछ

गुजरते वक्त के साथ

अपनी मासूमियत

बेच आये दुनियादारी के

बाजार में,


लाख कोशिशें की

हर किसी को खुश रखने की,

नाकाम हुए तो अपने लिए

सबको छोड़ आये,

सहमा हुआ सा मन

हर किसी के लिए

चट्टान बना ना खुद के

लबों पर हँसी आई

न गैरों को ही हँसा पाए


ऐ ख़ुदा तू ही बता

अब और क्या किया जाए

इसलिए मन्नतों का

इक दीया आज

दर पर तेरे जला आये।


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