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Surendra kumar singh

Others

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Surendra kumar singh

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यादों का समुन्दर

यादों का समुन्दर

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यादों के समुन्दर में,

कामनाओं से भरी भरी जीवन की नाव

निर्बाध रूप से सैर को निकली है,

लहरों से दोस्ती है

भंवर से दिल्लगी है,

तूफान को समेट लिया है

अपनी तली में।

दिलचस्प नजारा है

सूरज रास्ता दिखा रहा है

हवा गति दे रही है

और कोई आवाज सी दिशा

चप्पू की तरह नाव खे रही है।

लगता है कायनात उतर आयी है

कामनाओं की नाव में।

आओ न तुम भी

इस नजारे का लुत्फ लें।


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