यादें
यादें
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पुरानी हैं ,पर सुन्दर हैं
जब भी खोलती हूँ
ये यादों का पिटारा
बह जाती हूँ नदिया की धार सी
एक सुन्दर व सुहाने सफर के लिए,
जिसमें है केवल मुस्कानों की निर्मलता
चेहरों की स्वच्छता,
बचपन का भोलापन,
खुशियों का पारावार,
होता है मेरे साथ
बस मेरे साथ।
जिंदगी के हर उँचे नीचे रास्ते पर
अपने किनारों को बचाती,
चल पड़ती हूँ नई राह पर
किसी बंज़र को सिंचित करने,
किसी प्यासे की प्यास बुझाने
अपने अध्यापन के माध्यम से
ज्ञान की अलख जगाने,
नहीं पता कैसा होगा आगे का सफर
पर प्रयास ....
अथक ,अनवरत
बहना है मुझे ऊँचे -नीचे रास्ते
पार कर बहना है मुझे।
