STORYMIRROR

Prashant Kadam

Others

5.0  

Prashant Kadam

Others

यादें

यादें

1 min
701


अब मकान बहुत पक्के है

सिमेंट कांक्रीट से बने है

धरती के सहारे पर खड़े है

मगर आसमान मे जा पहुंचे है ।


अब ना कोई आंगन है

ना ही अगल बगल वृक्ष है

ना चिड़ियों की चहक है

ना फूलों की मस्त महक है ।


ना अड़ोस मे पड़ोसी है

ना ही कोई रिश्तेदार है

हम अपने घर के अंदर है

पर अपनों से कोसो दूर है ।


हम हममें ही उलझे है

कामकाज में व्यस्त है

अगले किस्त की चिंता है

जो हमे व्यग्र रखती है ।


चाँद के नज़दीक पहुंचे है

पर शांती नही मिलती है

हम साथ साथ तो रहते है

पर दो शब्दों के मोहताज है ।


सच अब सब कुछ पास है

पर जैसे घर के दरवाज़े बंद है

वैसे ही सूख शांति की कमी है

पुराने दिनों की सिर्फ यादें है ।




विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन