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Prashant Kadam

Others

5.0  

Prashant Kadam

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मुंबई !!

मुंबई !!

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मुंबई में रहना है तो सब भुगतना ही पड़ेगा

हो लाख मुसिबतें पर हमें सहना ही पड़ेगा


भर भर कर यहां रोज युं आते है कंई लोग

बसने यहा, मंदिर मस्जिद चढाते है वों भोग


उनकी तम्नाओं का आदर करना ही पड़ेगा

होती हो मुसिबत पर हमे सहना ही पड़ेगा


मुंबई में रहना है तो सब भुगतना ही पड़ेगा

हो लाख मुसिबतें पर हमें सहना ही पड़ेगा 


चलना भी नहीं मुमकिन, बच्चे कहा खेलें

हर बचे टुकड़े पर यहां बस रहे है मोहल्ले


बची हुई जगह पर गुजारा करना ही पड़ेगा

होती अगर भीड़ पर हमे सहना ही पड़ेगा


मुंबई में रहना है तो सब भुगतना ही पड़ेगा

हो लाख मुसिबतें पर हमें सहना ही पड़ेगा


गाडीयां तो यहां रुक रुक कर है चलती

पब्लीक यहां शांती से चल भी नहीं सकती


हवा भी तो यहां अब कार्बनकी हैं मिलती

बढते हुये प्रदुषण को युहीं सहना ही पड़ेगा


मुंबई में रहना है तो सब भुगतना ही पड़ेगा

हो लाख मुसिबतें पर हमें सहना ही पड़ेगा


पेडोंकी जगह बन रहे है कांक्रीट के जंगल

गली गली शहर शहर बस हो रही है दंगल


अब कुछ नहीं कुशल यहाँ कुछ नहीं मंगल

बची हुई जींदगीको युहीं बिताना ही पड़ेगा


मुंबई में रहना है तो सब भुगतना ही पड़ेगा

हो लाख मुशीबतें पर हमें सहना ही पड़ेगा


बारीश भी यहां आती है तो आती है जोरसे

बह जाते है सब रस्ते और होते है क‌‌ई हादसे


पब्लीक ही करती है फिर मदत अपने मनसे

इंसानियत ही तो दिखती है लोगों की शानसे


मुंबई में रहना है तो सब भुगतना ही पड़ेगा

हो लाख मुसिबतें पर हमें सहना ही पड़ेगा



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