यादें बचपन की
यादें बचपन की
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वो कागज़ की कश्ती वो बारिश का मौसम
वो नानी का गाँव वो बचपन का अल्हड़पन
वो पेड़ो का झुंड वो कच्ची सड़के
वो लहराते खेत वो सावन का मौसम।
वो बचपन की यादें लिखते हुए कलम से
वो कलम और स्याही का हमसे हर पल का नाता
बचपन मे लिखते थे जो सबक इस कलम से
वो हम ना कभी भूले वो सबक है याद हमको आज भी ।
नही टूटा कभी हमारा नाता कागज़ कलम से
इससे है हमारा रोम रोम का नाता
इसीलिए लिखते है हम हाल-ए-दिल अब अपना
ये कागज़ कलम स्याही है दोस्त हमारी हर पल की।
