वर्षा रानी
वर्षा रानी
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छाई काली घटाएं घनघोर
नाचें इन्हें देखकर मेरा मन मोर
जाने क्यों हो उठा यह विभोर
बादल हो गये हैं मतवारे
हो बैठे ये कारे कारे
शीतल वर्षा को संग लाए
चलते हैं यह मीलों दूर
काले बादल गरज गरज बरसे
मन ना जाने क्या पाने को तरसे
पृथ्वी यह लटपट हो जाए
इस बादल से अपनी प्यास बुझाए
आई है देखो वर्षा रानी
संग पहनी काली चुनरी सयानी
लगती हैं यह बड़ी रूमानी
भाव में डुबो कर चली जाती हैं
इस पृथ्वी की प्यास बुझाकर आगे बढ़ जाती है।
