वक़्त
वक़्त
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आज हूँ मैं कल नहीं
वक़्त हूँ मैं ठहरता नहीं
गुज़र ही जाता हूँ,
देखे अनदेखे चलता जाता हूँ
वक़्त हूँ मैं ठहरता नहीं
कभी बीते पलों की याद में
कभी आने वालों की आस में
मैं चला जाता हूँ
और पाने की प्यास में
आज हूँ मैं कल नहीं
वक़्त हूँ मैं ठहरता नहीं
एक पल कोई जीत ले मुझे
दूसरे पल हार जाये सबसे
एक पल का गुरूर
दूसरे पल में चूर
चलते जाना मेरी खूबसूरती है
न ठहरना मेरा दस्तूर
आज हूँ मैं कल नहीं
वक़्त हूँ मैं ठहरता नहीं
