वक़्त
वक़्त
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कल रात बेटे ने फोन पर कहा
माँ आप तो कह रही थी
कुंडली में ये समय अच्छा है
देखिए ना कितना टेंशन हो रही
मैंने समझाया उसे कुछ यूं
"बच्चे इसे अच्छा वक़्त ही कहेंगे
अपनी छत के नीचे पत्नी के साथ
दाल नून रोटी काम करते खा
रहे हो !"
उनसे पूछो जिनके सिर पर छत नहीं,
रोटी के भी जिनको लाले है पड़े!
अब बस राम नाम जपो और
सहजता से वक़्त गुजारो!
वो हँसा और बोला माँ आप भी ना
समझ गया मैं, बस अब रहने भी दो..
