विवाह
विवाह
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विवाह भी एक संस्कार है, जीवन का !
पाणिग्रहण होता है दो दिलों का जिसमें
देकर साथ, सात फेरों की दुनिया
जब एक नयी मुकम्मल
जीवन की शुरुआत करती है।
दो अलग दिल की धाराएँ
मन में अपने अनगिनत ख़्वाब सजाये
अग्नि को साक्षी मानकर
जब एक साथ बहने का वादा करती हैं ।
शुरू होता है फिर यहीं से
जीवन का एक नया सिलसिला..
जब दो अजनबी दिल प्रेमसूत्र में बंधकर
एक ही मंज़िल पर ..
पहुँचने का रुख अख़्तियार करते हैं ।
