विषय ।। आँंचल की ताकत।। पर स्वरचित दोहे रचयिता आत्म प्रकाश कुमार अहमदाबाद
विषय ।। आँंचल की ताकत।। पर स्वरचित दोहे रचयिता आत्म प्रकाश कुमार अहमदाबाद
आँचल की ताकत यहांँ,जाने सकल जहान।
आंँचल की छाया तले पला,बढ़ा इंसान।।१।।
आँचल की ताकत यहांँ,किसे नहीं मालूम।
कौन रहा संसार में, आँचल से महरूम ।।२।।
ताकत आँचल की समझ ,और उसे पहचान।
आँचल ने पैदा किये, धरती पर भगवान ।।३।।
आँचल चन्दा चाँदनी ,आँचल पीपल छाँव।
आँचल में ताकत बड़ी, शहर रहे या गाँव।।४।।
पाया आँचल मात का,पाया मात दुलार।
ऐसे बच्चों के लिए, जीवन है उपहार ।।५।।
प्रहलाद बचे आग से , देख होलिका खेल।
हुआ यहाँ होता नहीं, जो आँचल से मेल।।६। ।
आँचल पाकर झूमते ,हैं भारत के लाल।
दुश्मन को हैं भूनते, करते रोज़ कमाल।।७।।
भर आँचल में लाल को ,दूध पिलाए मात।
चाटे- चूमे गोद ले सहलाती है गात ।।८।।
