STORYMIRROR

निशान्त मिश्र

Others

2  

निशान्त मिश्र

Others

विनय न मानत - पुलिस से अनुरोध

विनय न मानत - पुलिस से अनुरोध

1 min
169

रोके से जे ना रुकैं

कर्फ़्यू मा हिहिहाय

विनय धरौ फिर ठेंगा पै

देया लट्ठ चटकाए


देया लट्ठ चटकाए

कि सोहरावैं हफ्ता भै

कतई न उठि पावैं खटिया से

चाहे गरियावैं बल भै


सुना हो पांड़े सुना तेवारी

लट्ठ प्यास एनकै अति भारी

रत्नाकर जब मानेन नाही

एन तौ सारेन अति व्यभिचारी


जिन पूंछा कि कहां जात अहैं

केवल लट्ठ बजावा एनका

तबहूं पै चोरकटई छांटैं

बल भै फिर लतियावा एनका


Rate this content
Log in