STORYMIRROR

Vaishno Khatri

Others

3  

Vaishno Khatri

Others

विडम्बना

विडम्बना

1 min
188

मैं मरने से 

नहीं डरती

परन्तु 

दूसरों की मौत से

डर लगता है,

मैं इसे अपना

साहस मानूँ 

या 

अपनी कमजोरी


वह भी सच है

मैं जानती हूँ

फिर भी परेशान हूँ 

रात आते ही न जाने क्यूँ?


दिन की रंगीनियाँ 

उदासियों में परिवर्तित हो जाती हैं

दिल घबराने लगता है

ख़ामोशी से 

एक अज़नबी दहशत

अँधियारा पैदा करती है

मेरी सारी खुशियाँ न जाने

कहाँ खो जाती हैं |


 



Rate this content
Log in