STORYMIRROR

Divyanshu Mishra

Others

4  

Divyanshu Mishra

Others

वेतन

वेतन

1 min
12

नया महीना हर बार नई ऊर्जा लाता है
इसी ऊर्जा से कर्ज़दार ईएमआई का बोझ उठाता है
नई तारीख़ बैंक खाते को पल भर की ख़ुशियाँ देती है
चाहे कम हो या अधिक, सबकी जेब गर्म होती है

वेतन का संदेश देखकर,
निगाहें ज्यों ही हटती हैं।

कुछ ही क्षणों में ट्रिंग-ट्रिंग,
फिर दो ईएमआई कटती हैं।

एक ‘गृह-ऋण’ की भेंट चढ़ी,
जिसने दी छत को पहचान,
एक ‘वाहन-किस्त’ ले डूबी,
दिखावे का झूठा सम्मान।

फिर शेष रह जाती है कुछ साँसों की गणना,
जिनमें सपनों से अधिक दायित्व बसते हैं
बिजली, जल, शिक्षा और राशन,
सब पहले याद आते हैं, स्वयं बाद में बसते हैं

मुस्कान जो वेतन संग आई थी,
वह तारीख़ों के साथ मौन हो जाती है
पर पुरुष थक कर भी हारता नहीं,
क्योंकि घर की नींव उसी से बची रह जाती है


वो जानता है कि अगला महीना फिर दस्तक देगा,

वही ऊर्जा, वही संघर्ष, फिर से जन्म लेगा।

कर्ज और सीमित साधनों के बीच वो अटल खड़ा है,

क्योंकि वो 'सिर्फ' पुरुष नहीं, अपने परिवार का आधार बड़ा है।


Rate this content
Log in