STORYMIRROR

Jyoti Sharma

Others

2  

Jyoti Sharma

Others

उम्मीदें (बाल मनोविज्ञान)

उम्मीदें (बाल मनोविज्ञान)

1 min
119

एक बेचारा बालक सोचे कैसे मैं समझाऊं

कैसे अपनी ज़िद्दी माँ को मैं ये विश्वास दिलाऊं


बहुत जतन से पाए मैंने देखो नंबर चार

फिर भी ना मेरी माता को आता मुझ पर प्यार


क्या समझाऊं दिन भर के मैं कितनी कोशिश

करता हूं

अंक कहीं ना कम आएं बस यही सोचकर

डरता हूं


भोली है मेरी माँ को उम्मीदें मुझसे ज्यादा हैं

पर रखना तू याद ओ माँ यह मेरा तुझ से

वादा है


तेरी राह के कांटों पर मखमल बनके

बिछ जाऊंगा

अच्छा शिष्य ना बन पाऊं पर अच्छा

पुत्र कहाऊंगा


बुद्धि मेरी छोटी चाहे दिल तूने है बढ़ा दिया

प्रेम रगों में बहता मेरी ऐसे तूने बड़ा किया


तू मेरी मूर्खता को ना अपने विवेक से तोल

इतना कुछ कह डाला मैंने अब तू भी कुछ

तो बोल


जो भी कुछ होता कक्षा में मेरा नहीं है दोष

खुश हो जा अब तो ओ माँ और कर ले तू संतोष



Rate this content
Log in