कोई वक़्त मुकर्रर कर दे तू ,मेरे आने का कोई ठौर बता ! कोई वक़्त मुकर्रर कर दे तू ,मेरे आने का कोई ठौर बता !
वो सहमी सी हंसी और आंखों में नमी शायद तुम नाराज़ थी किसी बात पर! वो सहमी सी हंसी और आंखों में नमी शायद तुम नाराज़ थी किसी बात पर!
समय का पहिया...! समय का पहिया...!
धूल छड़ी इक किताब पुरानी, तेरी मेरी नज़दीकियों की वो कहानी, मिली थी कल तन्हा मुझे, ढूंढ रही शायद वो पु... धूल छड़ी इक किताब पुरानी, तेरी मेरी नज़दीकियों की वो कहानी, मिली थी कल तन्हा मुझे,...
जिंदगी का खेल भी शतरंज की बिसाख पर है बिछा पड़ा जिंदगी का खेल भी शतरंज की बिसाख पर है बिछा पड़ा
शैतानी देख कहती, खाना अब न दूँगी तुझे, फिर मार मार के माँ का खिलाना अच्छा लगता है. शैतानी देख कहती, खाना अब न दूँगी तुझे, फिर मार मार के माँ का खिलाना अच्छा लगता ह...