एक पुराने ब्लज़ेर की जेब से दो सूखे बादाम मिले हैं एक पुराने ब्लज़ेर की जेब से दो सूखे बादाम मिले हैं
हर खुशी में उसकी मुस्कराहट को याद करता हूँ, हर ग़म में उसके सहारे को महसूस करता हूँ। हर खुशी में उसकी मुस्कराहट को याद करता हूँ, हर ग़म में उसके सहारे को महसूस करता ह...
A poem about changing the centres A poem about changing the centres
लोगों से क्या, अब खुद से अंजान रह जाते हैं शीशे में भी हम, नज़र नहीं आते हैं|| लोगों से क्या, अब खुद से अंजान रह जाते हैं शीशे में भी हम, नज़र नहीं आते हैं||
कभी करीब से देखो मौत को परवानो कि तरह, तो उसके दामन में गिरे अश्क में भीग जाने को दिल हो ही जायेगा। कभी करीब से देखो मौत को परवानो कि तरह, तो उसके दामन में गिरे अश्क में भीग जाने ...
वो दोस्त और वो लम्हे बेहद खूबसूरत थे, कॉलेज के दिन भी क्या दिन थे। वो दोस्त और वो लम्हे बेहद खूबसूरत थे, कॉलेज के दिन भी क्या दिन थे।