तेरी तलाश में
तेरी तलाश में
1 min
406
बहुत दूर निकल चुकी हूँ
दुनियाँ के अनचाहे शोर से
लोगों के मतलब भरे रिश्तों से
अनचाहे लगाव से,
अवांछित भावनाओं की भीड़ से
सिर्फ मतलब भरे अंदाज से
सुकून देती है बस तेरी रहमत मुझे
विश्वास व भरोसा है तेरी अनुकम्पा का मुझे
बस इसी सतत प्रयास में हूँ मैं
और इसी तलाश में हूँ मैं ।।
