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Tripti Dhawan

Others

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Tripti Dhawan

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तार से बेतार तक

तार से बेतार तक

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फोन के तारों ने एक तार जोड़ रखा था,

बेतार मोबाइलों ने डोर तोड़ दी,


जिस एक सोफे पर सब लटक जाया करते थे,

अब कोने कोनों तक राह मोड़ दी,


हर कोई अपना फोन लिए टहलता है,

बेतार फोन का भार लिए टहलता है


दूर दूर तक सबसे रिश्ते जुड़ गए,

घर में अब कोई कहां ठहरता है ।।



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