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SUNIL JI GARG

Children Stories

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SUNIL JI GARG

Children Stories

स्वागत सर्दी का

स्वागत सर्दी का

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सर्दियों की मस्त गुनगुनी सी धूप

सुंदरी माँ संतरे खाती थी, छील छील 

पास में लेटी होती नन्ही सी गुडिया 

पालने की डोरी कभी तनाव कभी ढील


उसी गुड़िया से खेलने और दुलारने को 

लंच में दफ्तर से आया करता था वो घर 

पापा को खूब पहचानती थी बिटिया 

महीन, मद्धम मुस्कान लगती थी रुचिकर 


गुलाबी शनील बिटिया को लगेगा मुलायम 

आज यही सोच पापा लाये इक नयी रजाई 

मम्मी ने बिटिया की तरफ से दिया धन्यवाद

पर दाम पूछा तो बोलीं, अरे इतनी मँहगाई 


वैसे सर्दियों की रातें और वो देर वाली सुबह 

कुछ ज्यादा कसमसा कर रजाई से निकलना 

सब्जी, फलों से भरपूर अपने खाने की प्लेट 

दस्ताने, टोपी से लैस होकर घर से निकलना 


मौसम हो तो ऐसा हो कि हर छोटी बात लगे 

जैसे हो कोई ख़ास ही बात बिलकुल अलग सी 

यूँ तो सब मौसम होते हैं अपनी ही तरह के 

पर सर्दी के मौसम की है रूमानियत अजब सी।


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