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Chetan Gondalia

Others


4.8  

Chetan Gondalia

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सुयोग - सचेतन

सुयोग - सचेतन

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चेतन ही जगत का कारण,

धरा ही पूरे जाग का आधार।

गर हो एकांकी,

केवल एक शक्ति मात्र।

दोनों हो जाए पूरक परस्पर 

हँसती खिल-खिलाती 

सृष्टि ,

बनती जीवन-तत्व से भरपूर।

तब, धरा न केवल धरा,

वह तो कहलाती वसुंधरा।

तब, चेतन न केवल चेतन, 

वह कहलाए सुयोग सचेतन।


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