STORYMIRROR

Chetan Gondaliya

Others

2  

Chetan Gondaliya

Others

सुयोग - सचेतन

सुयोग - सचेतन

1 min
422

चेतन ही जगत का कारण,

धरा ही पूरे जाग का आधार।

गर हो एकांकी,

केवल एक शक्ति मात्र।

दोनों हो जाए पूरक परस्पर 

हँसती खिल-खिलाती 

सृष्टि ,

बनती जीवन-तत्व से भरपूर।

तब, धरा न केवल धरा,

वह तो कहलाती वसुंधरा।

तब, चेतन न केवल चेतन, 

वह कहलाए सुयोग सचेतन।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन