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सुनहरा पल

सुनहरा पल

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यादें अतीत का 

गहरा समंदर 

न कोई पारावार 

न कोई सीमा 

जब डूबें 

डूबते ही चले 

चलचित्र की तरह

सीन बदलते रहते 

न समय की परवाह 

न दिल की गहराई की थाह 

बस यादों का सिलसिला 

दिल के आसपास 

यादों के समुंदर में 

डुबकी लगाता 

लगाता ही जाता 

भूत के गर्भ से 

कुछ सुन्दर पल चुरा 

भविष्य का 

सुनहरा सपना दिखा

दिल ख़ुश तो हुआ 

पर आज का 

सुनहरा पल गँवा कर 

जो अब पहुँच से परे।


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