STORYMIRROR

Rajeshwari Joshi

Others

3  

Rajeshwari Joshi

Others

स्त्री

स्त्री

1 min
243

स्त्री मात्र एक तन नहीं, 

एक मन भी है। 

जिसकी आँखों में, 

सीपी से समाये, 

मोती से सपने है। 

जिसके मन में हसरतों का, 

समंदर मचलता है। 

जिसमें मछलियों की, 

तरह रंग- बिरंगा सा, 

सपना तैरता है। 

जिसके आँचल में, 

ममता दीप जलता है। 

होंठ हँसते और दिल में, 

दर्द का दरिया बहता है। 

स्त्री मात्र एक तन नहीं, 

एक मन भी है। 



Rate this content
Log in