STORYMIRROR

डॉ0 साधना सचान

Others

3  

डॉ0 साधना सचान

Others

समय

समय

1 min
141

वक्त के संग चलना है, 

सब इसके खिलौना हैं

कहीं खिलता है मधुबन

कहीं सिसका सा है क्रंदन,

कहीं मखमल के गद्दे हैं

कहीं धरती बिछौना है।

जैसा कर्म जो करता

वैसा फल उसे मिलता

वक्त सबकुछ सिखाता है

उसके सामने हर इंसान बौना है ।



Rate this content
Log in