समय एक औरत का
समय एक औरत का
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अपने परिवार को संभालने के लिए
उसने अपना आप बदल डाला...
एक औरत ने अपने लिए समय कहां निकाला....
पूरी जिंदगी अपनी हर एक जिम्मेदारी निभाती है
एक औरत अपनी जिंदगी में अपने लिए ही
समय कहां निकाल पाती हैं...
पहले पिता का घर, फिर पति का घर,
फिर बच्चों को संभालती है...
एक औरत अपने लिए समय कहां निकाल पाती है ...
कभी किसी के लिए दुआ ...
तो कभी किसी के लिए मरहम बन जाती है...
और वह औरत खुद के लिए समय बचा ही नहीं पाती है
