समन्दर
समन्दर
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बड़ी मुश्किल से खुद को सम्भाल रखा है,
दर्द का इक समन्दर,
मैने भी अपने अन्दर पाल रखा है।
ये जो देेख रहे हो मेरे चेहरे पर सुकून
इक तूफान है. जिसेेे थाम रखा है।
मत पूछ बैठना मुझसे खैरियत मेरी
आँखों में आँसुओं का सैलाब रखा है
हम चला रहे है, तो चल रही है, जिन्दगी
वरना तो इसमें बड़ा बवाल रखा है।
खुुश रहिये बस यही सोचकर
कुछ उसकी ही रज़ा है. जो इस हाल
रखा हैै।
