Shailaja Bhattad
Others
जिंदगी बस,
शतरंज की बाजी बन कर रह गई है ।
बस दांव पर दांव ।
देती है हर वक्त नए-नए घाव ।
है नहीं कहीं भी सुकून की छांव।
सत्संग
श्री राम
सबकी होली
जयश्री राम
ओम नमः शिवाय
श्री राम ध्या...
हे प्रभु
जय जय श्रीराम...
राम- भरत
श्री राम- भरत