श्री कृष्ण
श्री कृष्ण
1 min
218
प्रिय कृष्ण को मेरा प्रणाम मिले
जहाँ प्रीति अथाह भरी हुई है।
धनवान हो या कि हो निर्धन ही
सबके लिए भक्ति भरी हुई है।
अपना लिया है जिसको हरि ने
उसकी गति भी सुधरी हुई है।
प्रभु की तो रही है अनंत कृपा
मुरली अधरों पे धरी हुई है
