STORYMIRROR

Amit Kumar

Others

3  

Amit Kumar

Others

श्रद्धा सुमन

श्रद्धा सुमन

1 min
387

तुम्हारा ह्रदय से शुक्रिया है

तुम्हें ह्रदय से वंदन है

तुमने जो दिया है

मैं उसका हक़दार नही हूँ

मैं इंसान हूँ

मुझमें बहुत सी खामियां है

मैं तुम्हारे नतमस्तक हूँ

क्योंकि तुम पत्थर होकर भी

आस्था से भरे हो

और मैं इंसान होकर भी

अनास्था का पुजारी हूँ,

तुम सदैव मूक बने

मुझे प्रेरणा देते आये हो

मैंने हमेशा तुममें

स्वयं को ही साक्षात किया है,

और मैं तुम्हारे ही रूप का

एक नन्हा सा प्रतिरूप हूँ,

तुम कुछ नही होकर भी

संसार के सबकुछ हो

और मैं अपने अहम का

एक खोखला खंडहर हूँ,

मैं आकाश धरा वायु

अग्नि जल आदि को

साक्षी मानकर ह्रदय की 

गहराइयों से तुम्हें नमन करता हूँ,

तुम कहाँ नहीं हो

तुम कण-कण में विधमान हो

और तुम्हारी इसी विभीषिका को

मैं अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं।

हे ईश्वर! मुझे श्रद्धा भक्ति शक्ति

नेक नीयत बरक़त से 

ओतप्रोत कर दो.....

तुम्हारी सदा जय हो......

मैं सदैव तुम्हारा ऋणी रहूंगा

मेरे घर परिवार दोस्तों साथी 

सहयोगियों को हंसी खुशी

कामयाबी और खुशहाली से

मालामाल कर दो

तन मन धन स्वस्थ जीवन का

शुभाशीष दो प्रभु!

      


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन