STORYMIRROR

Devesh Dixit

Others

3  

Devesh Dixit

Others

शब्दों का मेला

शब्दों का मेला

1 min
197

शब्दों का मेला है

मची है इसकी धूम

चुन सके तो चुन ले

फिर गाथा अपनी बुन

खेल इसका बड़ा निराला है

इसकी महत्वता को चूम

विष और अमृत भी यही है

इसको सोच समझ कर चुन

मैंने भी इसको चुना है

चुन कर हुआ मशगूल

शब्दों की माला पिरोई है

लिया कविता का रूप

मन तब प्रफुल्लित हुआ है

और मिला है सुकून

ऐसी रचना बनाई है

दिल गया है झूम



Rate this content
Log in