STORYMIRROR

Kahkashan Danish

Others

2  

Kahkashan Danish

Others

शाम से बातें

शाम से बातें

1 min
217

ऐ शाम ज़रा कुछ तो बोलो,

चुप काहे को रहती हो।

मैं तुमसे बातें करती हूं

तुम नदिया सी बहती हो।

मिलने को मजबूर हुए है,

ये कैसी लाचारी है?

लगता है मेरा ग़म तुम भी,

चुप हो कर ही सहती हो।।


Rate this content
Log in