सच्चा झूठ
सच्चा झूठ
सच्चा झूठ ओ बन्दे
यूँ हसरतों को जाया ना कर
सुनने सुनाने में दिल दुखाया ना कर ।
यहाँ किसके दुःख में कोई रोता है
यहाँ तो हँसते चेहरों की हर शख्स बाट जोहता है,
ये दुनिया ही ऐसी है कदर जज़्बातों की नहीं
तू क्यों फिर इस भँवरजाल में फँसकर खुद को डुबोता है।
ओ बन्दे यूँ हसरतों को जाया ना कर
सुनने सुनाने में दिल दुखाया ना कर ।
सच्चे दुःख की नुमाइश जो करेगा
क्या ख़ाक कोई तेरे काम आएगा
बस एक झूठी मुस्कान तो बिखेर ज़रा राज़ पूछने,
हज़ारों को खड़ा पायेगा
दर्द जितना तेरा बड़ा होता ही जाएगा
तू ज़िन्दगी में अपनों को खोता ही जाएगा
ओ बन्दे यूँ हसरतों को जाया ना कर
सुनने सुनाने में दिल दुखाया ना कर।
ज़हन में उमड़ती कड़वाहटों को फिर
अक्सर ऐसे मौकों पर ही ज़िंदा तू पायेगा
क्यों खोजता है हमदर्द इस मतलबी भीड़ में
जितना पाना चाहेगा उतना लुटता जाएगा
यहाँ ज़रूरत के हिसाब से बदलते हैं
किरदार मतलबपरस्ती क्या है
तू तब समझ पायेगा ओ बन्दे यूँ हसरतों को जाया ना कर
सुनने सुनाने में दिल दुखाया ना कर।
