STORYMIRROR

Alok Singh

Others

3  

Alok Singh

Others

सब माया मोह है

सब माया मोह है

1 min
766

हाथ में कलम है 

दिल में जलन है, 

सोचता हूँ जो मैं 

भरम ही भरम है, 

उस गली के मोड़ पे 

डूबता सूरज जो है 

बदहवाली के निशां पे 

लगता मूरख है वो, 

जल गया क्यूँ वो बेचारा 

दूसरे की राह में ,

दे उजाला अंधों को 

परेशान है खुद की आह में, 

किस नज़र से देख पाऊँ 

किस नज़र को मैं छुपाऊँ, 

ज़िस्म छलनी है हुआ अब 

दिल को अब कैसे दिखाऊँ। 


ಈ ವಿಷಯವನ್ನು ರೇಟ್ ಮಾಡಿ
ಲಾಗ್ ಇನ್ ಮಾಡಿ