STORYMIRROR

Indu Kothari

Others

3  

Indu Kothari

Others

सावन

सावन

1 min
316

नभ में सावन की बदली छाई

 देख उसे धरा भी है मुस्काई

 टकटकी लगाए कृषक निहारे

 जल्दी बरसों जलधार प्यारे

 

सूखी धरती कर रही पुकार

थक गये नयन‌ तेरा पंथ निहार

अब तो ठंडी ठंडी बहे बयार

तुम जल्दी बरसा दो जलधार 


मोर, पपीहा, दादुर बोले 

मन मयूर मस्ती में डोले

धरती ने ओढ़ी चूनर धानी

करे दामिनी भी मनमानी


रिमझिम फुहार बरसा देना 

मुरझाए मुखड़े हर्षा देना

मस्ती में झूमें डाली -डाली

हर्षित पीपर पात बजायें ताली


बिछुडे प्रेमी हिय मिलाना

रंग बिरंगे सुमन खिलाना

गायेंगे मधुप भी मीठा गाना

हे! प्यारे सावन, जल्दी आना


Rate this content
Log in