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Monika Garg

Others

5.0  

Monika Garg

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रुक जा दो पल ए समय

रुक जा दो पल ए समय

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रुक जा दो पल ए समय ,

इतना तू क्यों बेदर्दी है।


इतनी भागा दौड़ी क्यों ,

इतनी भी क्या जल्दी है।


संग बहारें लेकर चलेंगे, 

जरा उनको आने दे।


संगदिल ना तू हो इतना, 

जरा खुशियों की घटाएं छाने दे।


होकर फूलों से रूबरू ,

भंवरो ने बगावत कर दी है।


रुक जा दो पल ए समय ,

इतना तू क्यों बेदर्दी है।


इतनी भागा दौड़ी क्यों ,

इतनी भी क्या जल्दी है।


छाई घटाएं सावन की, 

मेघा शम शम बरस रही।


पिया मिलन की ऋतु में , 

यह रूह मिलन को तरस रही।


खोकर पिया की बाहों में ,

अरमानों ने शरारत कर दी है।


रुक जा दो पल ए समय ,

इतना तू क्यों बेदर्दी है।


इतनी भागा दौड़ी क्यों ,

इतनी भी क्या जल्दी है।


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