रिश्तों की पोटली

रिश्तों की पोटली

1 min 147 1 min 147

भाग रही ये जिंदगी

हम जो कभी गुंथे थे रिश्तों में

आज बिखरे हैं टूट के

जीवन हुआ बियाबान

जीना हो गया मुश्किल


कभी दौड़ता था मन रिश्तों में

अब हटते कदम पीछे हमारे


Rate this content
Log in