STORYMIRROR

Garima Kanskar

Others

3  

Garima Kanskar

Others

रिश्तों का अंत

रिश्तों का अंत

1 min
337

सच अक्सर

दिल को चुभ

जाता है

और आँखों से

निथर जाता है

झूठ दिल को

भा जाता है

और होठों पे

मुस्कान छोड़

जाता है


जब झूठ सामने

आता है तो सारी

मुस्कान क्रोध

की ज्वाला में

बदल जाती है

रिश्ते की मिठास

कड़वाहट का घूट

पी जाती है

और कड़वाहट

रिश्तों की

मधुरता को कड़वे

जहर में परिवर्तित

कर जाती है

जो रिश्तों का अंत

कर देती है



Rate this content
Log in