STORYMIRROR

Anita Sudhir

Others

3  

Anita Sudhir

Others

पुण्यतिथि

पुण्यतिथि

1 min
831

खुले आकाश के परे 

अनंत विस्तार पा 

कहीं हो विलीन

हो चर अचर से परे 

कहीं भी रहो तुम

ढूंढती होगी 

अपना संसार।


तुम्हारी ही आशीषों 

से भरा है तुम्हारा परिवार

दूर कहाँ हो तुम

हृदय में भीतर तक समाई

आदर्शो और कृत्यों में 

आत्मसात किये 

पल पल पास में।


कितना समेट पाई मैं

कितना सहेज पाई मैं

कौन ये बताये 

अथक प्रयास किया 

तुम तो जानती हो ना माँ

 रह गई तुम्हारी

अभिलाषाएँ अधूरी।

 

सोच कसक उठता मन

भरे दिल से सादर नमन

देती रहना आशीर्वचन।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन