प्रथम अधिकार
प्रथम अधिकार
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आशंकित-घबराई,
थी मैं व्याकुल।
दर्द- वेदना से थी आकुल
फिर मिला चैन,
थमा सैलाब
नवजीवन की गूंजी आवाज़
अजब अनुभूति, नव अहसास
जीवन की हुई पूरी आस
अंजाने से थे,
पर पहचाने लगे अंग
नौ माह रहे जो मेरे संग
गोद आई,
मेरी परछाई
खुशी से आँख मेरी भर आयी
बन बेटी,“लक्ष्मी” आई मेरे घर
पावन किया उसने मेरा दर
उडेलूँगी उस पर अपना प्यार
माँ कहलाने का दिया जिसने
…प्रथम अधिकार ।।
