परियों की रानी
परियों की रानी
बचपन में सुनाती थी नानी,
दूर देश की परियों की कहानी,
जिसमें आता था घोड़े पर सवार,
सपनों का सुंदर सलोना राजकुमार..!!
कहीं दूर रहता था दानव महल में,
उठा ले जाता था नित मानव दबा बगल में,
अट्टहास से कॉंपती थी धरा और गगन,
किसी को पता नहीं था कहॉं है उसका भवन..!!
एक दिन गुजर रहा था आसमान में ,
देखा परियों की रानी को उपवन में,
मोहित हो गया उसके रूप रंग को देखकर,
खुश हो रहा था प्रणव प्रस्ताव भेज कर..!!
परियों की रानी को जब दूत ने प्रस्ताव सुनाया,
वो हंसी और ना में अपनी गर्दन को हिलाया,
ना सुनकर वह दानव हुआ क्रोधित,
कैसे हुई उसकी परियोजना बाधित..!!
गुस्से से ऑंखें हो रही थीं लाल,
धधक रही थी ज्वाला रक्त में आया उबाल,
आया बन कर वह जीवन में तूफान ,
उठा ले गया परी को दूसरे जहान..!!
राजकुमार तब जब पहुंची बात ,
वो चल दिया छुड़ाने ना दिन देखा ना रात,
युद्ध हुआ था बड़ा ही भयंकर,
स्तब्ध रह गई थी दुनिया यह देखकर..!!
बुराई का हुआ अंत अच्छाई गई जीत,
सबका भय समाप्त हुआ जो थे भयभीत,
लेकर परी को अपने संग राजकुमार,
पहुंचा परी देश के राजा के द्वार..!!
हुआ उत्सव का भब्य आयोजन ,
पूरे देश को आने का मिला निमंत्रण,
उनके विवाह की उद्घोषणा हुई,
सुन कर खु़श सारी जनता हु़ई..!!
तो बताओ यह कहानी क्या सिखाती है,
अच्छाई की बुराई पर विजय बताती है ,
तम कितना भी हो लंबा सुबह जरूर आती है,
जो सच के पथ पर डटे रहते हैं उनके जीवन में खुशियॉं जरूर आती हैं..!!
